➤ रोगी कल्याण समिति (RKS) के माध्यम से नई भर्ती पर लगी रोक
➤ स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को जारी किए स्पष्ट निर्देश
➤ डेटा एंट्री ऑपरेटर, नर्स, वार्ड बॉय सहित कई पदों पर नहीं होगी नई नियुक्ति
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने रोगी कल्याण समिति (RKS) के माध्यम से होने वाली स्टाफ भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सभी सरकारी अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब RKS के माध्यम से किसी भी श्रेणी के नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जाएगी। अस्पतालों को फिलहाल उपलब्ध स्टाफ के साथ ही कार्य संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले ही रोगी कल्याण समिति की आय को सीधे राज्य ट्रेजरी में जमा कराने के निर्देश जारी किए गए थे। अब विभाग ने भर्ती प्रक्रिया पर भी स्पष्टता लाते हुए कहा है कि अस्पताल किसी भी स्तर पर RKS के माध्यम से नई नियुक्तियां नहीं करेंगे।
कई महत्वपूर्ण पदों पर होती थी नियुक्ति
प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से खाली पदों पर RKS के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती रही है। इसके तहत डेटा एंट्री ऑपरेटर, सफाई कर्मी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, नर्स, डाइटिशियन, वार्ड बॉय सहित कई अन्य आवश्यक पदों पर स्टाफ रखा जाता था। इसके अलावा कई अस्पतालों में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी रोगी कल्याण समिति के माध्यम से किया जाता रहा है।
अस्पताल प्रबंधन को दिए गए सख्त निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अधिसूचना का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। पहले कई मामलों में अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर RKS के माध्यम से स्टाफ नियुक्त कर लेते थे, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यह प्रक्रिया सरकार के स्तर पर संचालित की जा रही थी। नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब किसी भी प्रकार की नई भर्ती पर रोक रहेगी और अस्पतालों को उपलब्ध मानव संसाधनों के साथ ही कार्य करना होगा।
कर्मचारी महासंघ ने नियमित भर्ती की उठाई मांग
स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ और सुविधाओं के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि अस्पतालों में स्किल्ड कर्मचारियों की नियमित भर्ती की जानी चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उन्होंने आउटसोर्स भर्ती पर भी पूर्ण रोक लगाने और सरकार से नियमानुसार स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह टीम वर्क पर आधारित होती हैं और पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ का होना जरूरी है।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मानव संसाधन प्रबंधन और भविष्य की भर्ती नीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि खाली पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से कब और कैसे भरा जाएगा।



